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पॉली बाज़ार में

Berta keeps her promise and walks Polly through the Saturday market, where a spiky fruit, a chatty goat, and a handful of coins turn into a first real conversation.

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पॉली बाज़ार में

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बेर्ता ने अपना वादा निभाया। सुबह नौ बजे वह पंजे में टोकरी लिए हरे दरवाज़े पर दस्तक दे रही थी, और वहाँ से चौक तक का रास्ता साथ-साथ तय हुआ, जहाँ शनिवार का बाज़ार लगता है। गली में संतरों और ताज़ी रोटी की ख़ुशबू थी। “सुप्रभात!” पॉली ने पहली दुकान पर आवाज़ लगाई, और छतरियों की पूरी क़तार जैसे एक साथ जवाब दे उठी।

फल की दुकान पर धारीदार एप्रन पहने एक बकरी सेबों का एकदम सही पिरामिड बना रही थी। पॉली ने किसी हरी, काँटेदार चीज़ की तर...

फल की दुकान पर धारीदार एप्रन पहने एक बकरी सेबों का एकदम सही पिरामिड बना रही थी। पॉली ने किसी हरी, काँटेदार चीज़ की तरफ़ इशारा किया। “यह क्या है? मैंने यह फल पहले कभी नहीं देखा।” बकरी हँसी, एक पतली फाँक काटी और आगे बढ़ा दी। इस तरह पॉली ने सीखा कि इस मोहल्ले में पहले चखा जाता है, फ़ैसला बाद में होता है। “मुझे दो सेब चाहिए और वह वाला एक, चखने के लिए।”

“सब मिलाकर कितने का हुआ?” बकरी ने दाम बताया, बेर्ता ने सिर हिलाकर बताया कि दाम ठीक है, और पॉली ने सिक्के एक-एक करके ग...

“सब मिलाकर कितने का हुआ?” बकरी ने दाम बताया, बेर्ता ने सिर हिलाकर बताया कि दाम ठीक है, और पॉली ने सिक्के एक-एक करके गिने, हर गिनती पर थोड़ा गर्व लिए। “एक थैला दे दीजिए। सब कुछ घर तक ले जाना है।” लौटते हुए, थैला एक पंख के नीचे झूलता रहा, और पॉली ने तय किया कि बाज़ार अब हर शनिवार की आदत बनेगा। कुछ सबक़ सुनने से ज़्यादा चखने में अच्छे लगते हैं।

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